GENERATION OF COMPUTER
सन् 1946 में पहला Electronic Device, Vacuum Tube वाला ENIAC( Electronic Numerical Integrator And Computer) की शुरूआत ने कम्प्यूटर के विकास को एक Base Provide किया। कम्प्यूटर के विकास के इस क्रम में कई महत्वपूर्ण Devices की सहायता से कम्प्यूटर ने आज तक की यात्रा पूरी की है। विकास के इस क्रम को हम कम्प्यूटर में हुए परिर्वन के आधार पर पाँच पीढियों में बाटते है।
पहली पीढ़ी के कंप्यूटर Machine Language पर कार्य करते थे इस Generation के कम्प्यूटर Low Level Programming Language को समझते थे जिसका उपयोग operations perform करने में किया जाता था। यह कम्यूटर एक बार में केवल एक ही problem को solve कर पाते थे एक नई problem को solve करने मे operators को कई दिन या हफ्ते लग जाते थे। इनमे इनपुट के लिए Punch Card और Paper Tape का use किया जात था और आउटपुट प्रिंटआउट पर प्रदर्शित किया गया था।
इस Generation में ENIAC के अलावा और भी कम्प्यूटरों का निमार्ण हुआ जिनके नाम है।
EDSAC –ELECTRONIC DELAY STORAGE AUTOMATIC CALCULATOR
EDVAC-ELECTRONIC DISCRETE VARIABLE AUTOMATIC COMPUTER
UNIVAC – UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER (The UNIVAC was the First Commercial Computer Delivered To a Business Client)
UNIVAC-1- UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER-1
Second Generation के कंप्यूटर में Cryptic Binary Machine Language से symbolic, या Assembly, Languages का use किया गया, जो प्रोग्रामर को शब्दों में instructions specify करने देता हैं। इस समय High-Level Programming Languages भी Develop की जा रही थीं, जैसे कि COBOL और FORTRAN के शुरुआती Versions । ये पहले कंप्यूटर भी थे जो उनकी Memory में उनके Instructions को Store करते थे, जो एक Magnetic Drum से Core Magnetic Technology में चले गए।
इस Generation के पहले Computer Atomic Energy Industry के लिए Develop किए गए थे।
Integrated Circuit का आविष्कार टेक्सास इन्स्टूमेन्ट कम्पनी (Texas Instrument Company) के एक Engineer Jack Kilby ने किया था। इस Generation के कम्प्यूटरों मे ICL2903, ICL1900, UNIVAC1108 और SYSTEM1360 प्रमुख थे।
punched cards और printouts के बजाय, users ने keyboards और monitors के माध्यम से तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के साथ बातचीत की और एक operating system, के साथ interface किया, जिसने device को एक central program के साथ एक बार में कई अलग-अलग एप्लिकेशन चलाने की permission दी जो memory की निगरानी करते थे। पहली बार कंप्यूटर बड़े पैमाने पर दर्शकों के लिए सुलभ हो गए क्योंकि वे अपने predecessors की तुलना में छोटे और सस्ते थे।
Microprocessor Fourth Generation के कंप्यूटर लाए, इसमें हजारों integrated circuits एक single silicon chip पर बनाए गए थे। पहली पीढ़ी में जो कुछ एक पूरे कमरे भरा था वह अब हाथ की हथेली में फिट हो सकता है। इंटेल 4004 चिप, 1971 में विकसित की गई, कंप्यूटर के सभी components जैसे - central processing unit(CPU) और memory से लेकर input/output कंट्रोल तक - single chip में आ गये है।
1981 में आईबीएम ने अपना पहला कंप्यूटर Home user के लिए introduced कराया और 1984 में Apple ने Macintosh को पेश किया। माइक्रोप्रोसेसर भी डेस्कटॉप कंप्यूटर के दायरे से बाहर चले गए और जीवन के कई क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजमर्रा के products में माइक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे ये छोटे कंप्यूटर अधिक powerful होते गए, उन्हें Network बनाने के लिए एक साथ जोड़ा जाने लगा, जिससे अंततः इंटरनेट का विकास हुआ। Fourth Generation के कंप्यूटरों ने GUI, माउस और हैंडहेल्ड डिवाइसों के विकास को भी देखा।
इंटेल का पहला माइक्रोप्रोसेसर, 4004, टेड हॉफ और स्टेनली मजोर द्वारा designed किया गया था।
ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कम्प्यूटर था जिसे मिट्स नाम की कम्पनी ने बनाया था। इसी कम्प्यूटर पर बिल गेटस जो उस समय हावर्ड विश्वविद्यालय के Student थे, उन्होने BASIC Language को Install किया था। इस सफल कोशिश के बाद बिल गेटस ने Microsoft कम्पनी की स्थापना की जो दुनिया में Software की सबसे बड़ी कम्पपनी है। इस कारण बिलगेटस को दुनिया भर के कम्प्यूटरों का Owner कहा जाता है।
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प्रथम पीढी(First Generation of Computer)
पहला इलैक्ट्रॉरनिक कम्प्प्यूटर 1946 में अस्तित्व में आया था। जिसका नाम इलैक्ट्रॉनिक न्यूमैरिकल इन्टीग्रेटर एण्ड कैलकुलेटर(ENIAC) था। इसको J.P. Eckert तथा J.W. Mauchley ने बनाया था। इस Generation के कम्प्यूटर्स में vacuum tube का Use किया जाता था। जिसको सन् 1904 में John Ambrose Fleming ने बनाया गया था।पहली पीढ़ी के कंप्यूटर Machine Language पर कार्य करते थे इस Generation के कम्प्यूटर Low Level Programming Language को समझते थे जिसका उपयोग operations perform करने में किया जाता था। यह कम्यूटर एक बार में केवल एक ही problem को solve कर पाते थे एक नई problem को solve करने मे operators को कई दिन या हफ्ते लग जाते थे। इनमे इनपुट के लिए Punch Card और Paper Tape का use किया जात था और आउटपुट प्रिंटआउट पर प्रदर्शित किया गया था।
इस Generation में ENIAC के अलावा और भी कम्प्यूटरों का निमार्ण हुआ जिनके नाम है।
EDSAC –ELECTRONIC DELAY STORAGE AUTOMATIC CALCULATOR
EDVAC-ELECTRONIC DISCRETE VARIABLE AUTOMATIC COMPUTER
UNIVAC – UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER (The UNIVAC was the First Commercial Computer Delivered To a Business Client)
UNIVAC-1- UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER-1
ENIAC
UNIVAC-I
VACUUM TUBE
First Generation के कम्प्यूटरों कि निम्नलिखित विशषाताऍं थी।
- यह आकार में सबसे बडे़ कम्प्यूटर थे।
- इन कम्प्यूटरों में मुख्यय रूप से Vacuum Tube या Diode Valve नाम के Electronic Component का Use होता था।
- इनकी Data processing की Speed बहुत कम होती थी।
- ये कम्प्यूटर वज़न में काफी भारी थे। अत: इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना संभव नही था।
- First Generation के कम्प्यूटरों में Power consumption बहुत अधिक होती थी।
- इस Generation के कम्प्यूटर बहुत महंगे होते के साथ साथ प्रयोग करने में काफी कठिन होते थे।
- First Generation के कम्प्यूटर Machine Language पर कार्य करते थे। जहॉं सभी कमाण्ड तथा डाटा 0 तथा 1 में दिये जाते थे।
- Data Consolidated करने के लिए इनमें पंचकार्ड का Use होता था।
- कम्प्यूटरों को चलाने के लिए कई व्यकक्तियो की जरूरत होती थी।
- इन कम्प्यूटरों के Result अधिक Reliable नहीं थे।
द्वितीय पीढ़ी (Second Generation of Computer)
William Shockley तथा उनके सहयोगी वैज्ञानिकों द्वारा अमेरिका की Bell Laboratory में Transistor नाम के एक अन्य Electronic components का Invention 1947 में किया गया था। यह Semiconductor substance से मिलकर बना था तथा इसकी Efficiency Vacuum Tube से कहीं अधिक थी। इसे Second Generation के कम्प्यूटरों में Main component के रूप में प्रयोग किया गया था।Second Generation के कंप्यूटर में Cryptic Binary Machine Language से symbolic, या Assembly, Languages का use किया गया, जो प्रोग्रामर को शब्दों में instructions specify करने देता हैं। इस समय High-Level Programming Languages भी Develop की जा रही थीं, जैसे कि COBOL और FORTRAN के शुरुआती Versions । ये पहले कंप्यूटर भी थे जो उनकी Memory में उनके Instructions को Store करते थे, जो एक Magnetic Drum से Core Magnetic Technology में चले गए।
इस Generation के पहले Computer Atomic Energy Industry के लिए Develop किए गए थे।
TRANSISTOR
Second Generation के कम्प्यूटरों की मुख्य विशेषताऍं निम्नलिखित थी।
- इस Generation के कम्प्यूटरों में Vacuum Tube के स्थान पर Transistor का Use किया गया था।
- Transistor के Use के कारण Second Generation के कम्प्यूटरों का Size काफी छोटा था।
- Transistor में Heat कम निकलती थी अत: इन कम्प्यूटरों की लगातार कार्य करने की क्षमता अधिक थी।
- आकार में छोटे होने के कारण इनका वजन First Generation के कम्प्यूटरों की तुलना में काफी कम था। फिर भी इनको एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी मुश्किल ही था।
- इन्हें सिर्फ 1-2 व्यक्ति भी आसानी से Control कर सकते थे।
- इस Generation के कम्प्यूटरों की Processing की Speed First Generation के कम्प्यूाटर की तुलना में काफी अधिक थी।
- ये कम्प्यूटरों कम कीमत के होने के साथ साथ Use करने में काफी आसान थें।
- इनमें Data Store करने के लिए Magnetic Tape का Use किया जाता था।
- इसमें कार्य करने के लिए Assembly Language का Use होता था, जो कि मशीनी भाषा की तुलना में काफी आसान थी।
- इस Generation में निर्मित कम्प्यूटरों में मुख्यहत: UNIVAC, IBM700 तथा ATLAs आदि थे।
- Second Generation के कंप्यूटर अभी भी इनपुट के लिए punched cards तथा output के लिए printouts का Use करते थे।
तृतीय पीढ़ी (THIRD Generation of Computer)
THIRD Generation में कम्प्यूटर के क्षेत्र में क्रॉतिकारी परिवर्तन आया जब वैज्ञानिकों ने Hundreds of Transistors को मिलाकर एक अधिक शक्तिशाली Electronic components Integrated Circuit(IC) का आविष्कार किया। इसे THIRD Generation के कम्प्यूटरों में Main Component के रूप में Use किया गया।Integrated Circuit का आविष्कार टेक्सास इन्स्टूमेन्ट कम्पनी (Texas Instrument Company) के एक Engineer Jack Kilby ने किया था। इस Generation के कम्प्यूटरों मे ICL2903, ICL1900, UNIVAC1108 और SYSTEM1360 प्रमुख थे।
punched cards और printouts के बजाय, users ने keyboards और monitors के माध्यम से तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के साथ बातचीत की और एक operating system, के साथ interface किया, जिसने device को एक central program के साथ एक बार में कई अलग-अलग एप्लिकेशन चलाने की permission दी जो memory की निगरानी करते थे। पहली बार कंप्यूटर बड़े पैमाने पर दर्शकों के लिए सुलभ हो गए क्योंकि वे अपने predecessors की तुलना में छोटे और सस्ते थे।
INTEGRATED CIRCUIT
इस Generation के कम्प्यूटरों के मुख्यत विशेषताऐं निम्नलिखित हैं।
- इन कम्प्यूटरो में Transistors के स्थान पर IC का Use किया गया जो Transistor से अधिक Powerful था।
- IC का आकार Transistors के Circuit के आकार से छोटा होने के कारण इस Generation के कम्प्यूटरों का आकार काफी छोटा था।
- इन कम्प्यूटरों का भार भी Second Generation के कम्प्यूटरों की तुलना मे काफी कम था। अत: इनका एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना आसान था।
- इन कम्प्यूटरों में Electrical circuit का आकार छोटा होने के कारण इनके Processing Speed अधिक थी।
- Second Generation के कम्प्यूटरों की तुलना में इनका मूल्य भी कम था, इस कारण इनका उपयोग बढ़ गया था।
- इन कम्प्यूटरों का Heat Emission काफी कम था। अत: Air conditioning equipment लगाने पर इन्हें घण्टों तक चलाकर कार्य किया जा सकता था।
- THIRD Generation के कम्प्यूटरों में कार्य करने के लिए High Level Language का Use किया गया। First High Level Language का नाम फोरट्रान था।
- इस Generation के कम्प्यूटरों को Operate करने के लिए सिर्फ एक ही व्यकित की आवश्यकता होती थी।
- इस Generation के कम्प्यूटरों को Internal Memory भी दी गई थी, जिससे इनकी मैमोरी बढ़ गई थी।
- इस Generation में निर्मित कम्प्यूटरों में मुख्यकत: थे PDP श्रँखला के कम्प्यूटर तथा CDC-1700 आदि।
चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation of Computer)
Fourth Generation के समय में कम्प्यूटरों का सर्वाधिक विकास हुआ। इसी Generation में वे कम्प्यूटर बने जो कि Different कार्य करने में सक्षम थे- Calculation करना, Graphics बनाना, Sound तैयार करना, Data Communication करना आदि। इसी पीढ़ी में Integrated Circuit को अधिक Develop किया गया जिसे Large Integrated Circuit कहा जाता है इस Generation के Starting में ही सन् 1971 में एक वैज्ञानिक Marcian Edward "Ted" Hoff Jr. ने दुनिया का पहला Microprocessor बनाया लगभग 300000 Transistors के बराबर का Circuit एक इंच के चौथाई भाग में समाहित हो गया। इस आविष्कार से पूरी सेनट्रल प्रोसेसिंग यूनिट(CPU) एक छोटी सी चिप में आ गया। जिसे इस Generation तथा आने वाली Generation में भी Main component के रूप में Use किया गया। Microprocessor Use करने वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर कहा गया।Microprocessor Fourth Generation के कंप्यूटर लाए, इसमें हजारों integrated circuits एक single silicon chip पर बनाए गए थे। पहली पीढ़ी में जो कुछ एक पूरे कमरे भरा था वह अब हाथ की हथेली में फिट हो सकता है। इंटेल 4004 चिप, 1971 में विकसित की गई, कंप्यूटर के सभी components जैसे - central processing unit(CPU) और memory से लेकर input/output कंट्रोल तक - single chip में आ गये है।
1981 में आईबीएम ने अपना पहला कंप्यूटर Home user के लिए introduced कराया और 1984 में Apple ने Macintosh को पेश किया। माइक्रोप्रोसेसर भी डेस्कटॉप कंप्यूटर के दायरे से बाहर चले गए और जीवन के कई क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजमर्रा के products में माइक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे ये छोटे कंप्यूटर अधिक powerful होते गए, उन्हें Network बनाने के लिए एक साथ जोड़ा जाने लगा, जिससे अंततः इंटरनेट का विकास हुआ। Fourth Generation के कंप्यूटरों ने GUI, माउस और हैंडहेल्ड डिवाइसों के विकास को भी देखा।
इंटेल का पहला माइक्रोप्रोसेसर, 4004, टेड हॉफ और स्टेनली मजोर द्वारा designed किया गया था।
ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कम्प्यूटर था जिसे मिट्स नाम की कम्पनी ने बनाया था। इसी कम्प्यूटर पर बिल गेटस जो उस समय हावर्ड विश्वविद्यालय के Student थे, उन्होने BASIC Language को Install किया था। इस सफल कोशिश के बाद बिल गेटस ने Microsoft कम्पनी की स्थापना की जो दुनिया में Software की सबसे बड़ी कम्पपनी है। इस कारण बिलगेटस को दुनिया भर के कम्प्यूटरों का Owner कहा जाता है।
INTEL 4004 MICRO PROCESSOR
TED HOFF
इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषताऍं निम्न लिखित थी।-
- छोटे-छोटे Circuit के use के कारण इनका आकार काफी कम था। इस Generation के कम्प्यूटर लगभग पोर्टेबल कम्प्यूटरों की श्रेणी में आते थे। डेस्कटॉप कम्प्यूटर, नोट बुक कम्प्यूटर, पामटॉप कम्प्यूटर आदि इसी Generation के कम्प्यूटरों के उदाहरण है।
- इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की प्रॉसैसिंग की गति पिछली तीनों पीढि़यों से काफी तेज थी ये कम्प्यूटर माइक्रोसैकेण्ड(10-6 Sec) तथा नैनोसैकण्डे (10-9 Sec) में कार्य करते थे।
- Heat सहन करने की क्षमता काफी अधिक होने के कारण यह Air conditioning equipment(AC) के बिना भी कार्य करने में सक्षम थे।
- इन कम्प्यूटरो की कम कीमत होने के कारण इनका Use भी बहुत ज्यादा किया जाने लगा था।
- इनकाे एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थाणनान्तकरण, कम भार का होने के कारण आसान था।
- इनकी विश्वसनीयता काफी अधिक थी, क्योकि इनके Result शत प्रतिशत सही होते थे।
- इनकी मैमोरी अन्य पीढि़यो के कम्प्यूटरों की तुलना में काफी अधिक थी।
- आसान संरचना होने के कारण, इस Generation के कम्प्यूटरों का रखरखाव काफी आसान था।
- इन कम्प्यूटरों में भी कार्य करने के लिए High Level Language का Use किया जाता था। इस Generation में Develop की गई कुछ High Level Languages BASIC, COBOL, PASCAL आदि है।
- VERY LARGE SCALE INTEGRATION technique का Use किया गया।
- इस Generation के कम्प्यूटरों मे IBM-PC , ZX-SPECTRUM आदि कम्प्यूटर है
पॉंचवी पीढ़ी (Fifth Generation of Computer)
इस Generation के कम्प्यूटरों में सर्वाधिक परिवर्तन किये गये है। यह Generation निरन्तर विकासशील है। इस Generation मे वर्तमान के शक्तिशाली एवं उच्च तकनीक वाले कम्प्यूटरों से लेकर भाविष्य में आने वाले कम्प्यूटरों को शामिल किया गया है। इस Generation के कम्प्यूटरों में वैज्ञानिको Artificial Intelligence ने को समाहित करने के लिए प्रयासरत है आज के कम्प्यूटर इतने Develop है कि वे हर विशिष्टे क्षेत्र मुख्य रूप से Accounting, Engineering, Architectural assistant, Space तथा दूसरे प्रकार के Researches में उपयोग किये जा रहे है इसी पीढ़ी की शुरूआत मे कम्प्यूटरों को परस्पर जोड़ा गया जिससे Data तथा Information को आपस में Share and Communicate किया जा सके। कम्प्यूटर के Internal Electronic Circuit बोर्ड में VLSIC( very Large Scale Integrated Circuit) चिप को अब ULSIC( Ultra Large Scale Integrated Circuit) के रूप में प्रयुक्त किया जाने लगा। इस नयी तकनीक से माइक्रोप्रॉसैसर की कार्यक्षमता में वृद्धि और आकार में कमी आई। अब पोर्टेबल कम्प्यूटरों के परिपथ(Circuit) तैयार किये जाते हैं जिससे लैपटॉप, नोटबुक और पामटॉप कम्प्यूटरों का चलन बढने लगा है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में सबसे प्रमुख विशेषता इनकी सोचने समझने तथा निर्णय लेने की क्षमता है।PARAM SUPER COMPUTER
इस Generation के कम्प्यूटरों में मुख्यीत: निम्निलिखित विशेषताऍं है।
- इन कम्प्यूटरों में VLSIC व ULSIC तकनीक का प्रयोग किया गया।
- इन कम्प्यूटरों में कृत्रिम बुद्धि(Artificial intelligence) उपस्थित है, जिसके कारण इनमें निर्णय लेने की क्षमता है।
- इस Generation के कम्प्यूटर दो या तीन वस्तुओं में तुलना करने तथा सही वस्तुस का चुनाव करने में सक्षम है।
- इनकी प्रॉसैसिंग की गति काफी अधिक है। ये कम्प्यूटर अरबों गणनाऐं एक सैकण्डे में करते हैं। इनकी गति पिको सैकण्ड (10-12 SEC) में मापी जाती है।
- इनकी कीमत काफी अधिक है तथा ये सामान्य जरूरत के कम्प्यूटरों नहीं है। इनका Laboratories में ही देखा जा सकता है।
- इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्यम रूप से भारत में ही निर्मित कम्प्यूटर परम (PARAM) शामिल है
- सुपर कम्प्यूटर तथा रोबोट आदि मशीन इसी पीढ़ी के कम्प्यूटरों की श्रेणी में आते है।
- इस प्रकार के कम्प्यूटरों को, Knowledge Information Processing System कहा जाता है।








Nice information sir ji
ReplyDeleteSir expanded all generations plz
ReplyDeleteMENE FULL INFORMATION DE DI HAI GENERATIONS KE BARE ME
DeleteBahut badiya info
ReplyDeleteMast post
ReplyDeleteBhut badiya jankari
ReplyDeleteMast jankari
ReplyDeleteBahut badiya
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